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तहफ्फुज़ ख़त्मे नुबुवत का जलसा रजबी ग्राउंड,परेड कानपुर में हुआ संपन्न।

सुहैल आफताब,समय व्यूज,कानपुर।

नुबुव्वत हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सिर्फ अल्लाह के रसूल नहीं बल्कि‘खातमुन्नबीईन(आखिरी नबी)’’ हैं, और यह दोनों चीज़ें एक साथ जुड़ी हुई हैं, एक को दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। उक्त विचार जमीयत उलेमा व मज्लिस तहफ्फुज़े खत्मे नुबुव्वत कानपुर के ज़ेरे एहतमाम रजबी ग्राउण्ड परेड में आयोजित तहफ्फुज़ ख़त्मे नुबुव्वत व तहफ्फुज़े हदीस कान्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में तशरीफ लाये दारूल उलूम देवबन्द के कुलपति (मोहतमिम) मुफ्ती अबुल क़ासिम नोमानी ने व्यक्त करते हुए कहा कि ईमान व अकी़दे(आस्था) की हिफाज़त सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। जब इंसान सही अक़ीदे से ही वाक़िफ नहीं होगा तो वह आसानी से गलत अक़ीदे का शिकार हो सकता है। यकीनन हमारे ऊपर बहुत सी ज़िम्मेदारियां हैं लेकिन तमाम ज़िम्मेदारियों के ऊपर नबी स0अ0व0 की शान, अज़मत और खत्मे नुबुव्वत की हिफाज़त बिल्कुल बुनियादी ज़रूरत है।दारूल उलूम देवबन्द के उपकुलपति मुफ्ती मुहम्मद राशिद आज़मी ने कहा कि पूरी उम्मत इस पर एकमत है कि जिस तरह अल्लाह ने कुरआन की हिफाज़त की ज़िम्मेदारी ली है उसी तरह हदीसों की हिफाज़त की भी ज़िम्मेदारी ली है। कुरआन को हदीस को माने बगैर समझा ही नहीं जा सकता है। जमीयत उलेमा हिन्द के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी ने तहफ्फुज़े खत्मे नुबुव्वत के सन्दर्भ में जमीयत उलेमा द्वारा किये गये विश्वस्तरीय प्रयासो के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।हरदोई से तशरीफ लाये मौलाना शाह अफज़ालुर्रहमान क़ासमी ने कहा कि नुबुव्वत अल्लाह की रहमत है, लेकिन अल्लाह ने कह दिया कि हमने दीन को मुकम्मल कर दिया है यानि हज़रत मुहम्मद स0अ0व0 जिस लिये तशरीफ लाये थे वह काम मुकम्मल हो गया। अब नुबुव्वत की ज़रूरत नहीं रही क्योंकि अल्लाह ने अपने महबूब नबी स0अ0व0 पर नुबुव्वत के सिलसिले को पूरा कर दिया।भिवन्डी, महाराष्ट्र से तशरीफ लाये मौलाना सैयद मुहम्मद तलहा क़ासमी ने कहा कि बातिल का उद्देश्य किसी विशेष झूठे नबी का इक़रार कराना नहीं बल्कि उनका उद्देश्य हज़रत मुहम्मद स0अ0व0 की सच्ची नुबुव्वत से दूर करना है।लखनऊ से आये जमीयत उलेमा हिन्द के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल अलीम फारूक़ी ने कहा कि हुजूर स0अ0व0 का फरमान है कि ‘‘मैं सिलसिला ए नुबुव्वत को खत्म करने वाला हूं, मेरे बाद कोई नबी नहीं आयेगा’’ इसलिये अब कोई नुबुव्वत का दावा करे, उसका दावा हरगिज़ मंजूर नहीं। अब क़़यामत तक रिसालते मुहम्मदिया चलेगी, यही दीन चलेगा, इसी में निजात है, इसके बेगैर निजात का कोई ज़रिया नहीं।कान्फ्रेंस के आयोजक जमीयत उलेमा के प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने कहा कि इस्लाम का आधार कलमा तैयबा पर है। जिसके दो भाग हैं, एक अल्लाह की वहदानियत (एक मानना) और दूसरा रिसालत (हुजूर स0अ0व0 को नबी मानना) पर ईमान लाना। जिस तरह अल्लाह के अलावा कोई अन्य खुदा होने का दावेदार नहीं हो सकता है उसी तरह हज़रत मुहम्मद रसूलुल्लाह स0अ0व0 के बाद नुबुव्वत के दावेदार की नुबुव्वत के मंच पर क़दम रखने की गुस्ताखी भी बर्दाश्त करने के क़ाबिल नहीं। कान्फ्रेंस को मौलाना इस्लामुल हक़ अस्जद क़ासमी, मुफ्ती ज़फर अहमद क़ासमी, मुफ्ती असदुद्दीन क़ासम समेत अन्य उलेमा ए किराम ने भी सम्बोधित किया। शुभारम्भ का़री मुजीबुल्लाह इरफानी ने कुरआन की तिलावत से किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उलेमा, इमाम के साथ-साथ हज़ारों की संख्या में क्षेत्रीय लोग भी मौजूद रहे,जलसे को पुर अमन और पुर सुकून बनाने के लिए जलसे के आयोजकों ने अपने सभी साथियों के साथ -साथ क्षेत्रीय पुलिस प्रशासन और पुलिस अफसरान के इंतज़ाम की भी तारीफ़ की और उनके सहयोग का शुक्रिया अदा किया।

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